गुलपोश कहीं इतराये कहीं
महके तो नज़र आ जाये कहीं
तावीज़ बनाके पहनुँ उसे
आयत की तरह मिल जाये कहीं
वो यार है जो इमान मेरा
मेरा नगमा वही , मेरा कलमा वही
यार मिसाल-ए-ओस चले
पाँवों के तले फ़िरदौस चले
कभी डाल-डाल ,कभी पात​-पात
मैं हवा पे ढूँढुं उसके निशाँ

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